वज़ूद तथा अन्य कविताएँ

                

 कविताएँ

मोह

 

सीमा पटेल 

ये सुगंध, महक, ख़ुशबू

सब तुम्हारे ही तो प्रतिमान हैं

कर देती हैं तरोताज़ा  मुझे

तुम्हारे उपमानों की प्यारी वल्लरी l

 

जब तुम पढ़ते हो कसीदे

मेरे लिए, प्यार भरे अंदाज़ में

तब चहक उठती हूँ, बुलबुल की तरह

और बैठ जाती हूँ , तुम्हारे ह्रदय पटल पर  l

 

फिर भूल जाती हूँ , नीलगगन की उड़ान भरना

क्योंकि, तुम्हारी सुगंध

मुझे सम्मोहित करती रहती है

बाँध लेती है मुझे मोहपाश  में

तुम्हारी महकती साँसो के जाल में l

 

तुम्हारी संवेदनाओं ने

मुझे तुम्हारा आदी बना दिया है

बाँध लिया है तुमने मुझे

अपने मोह के धागों में

उस बंधन में बँधा रहने दो मुझे

चिरकाल के लिए ,मुक्त न करो

रहो मेरे ह्रदय में तुम

चिरनिद्रा तक l

 

 

डायरी

 

कभी सूखे फूल

कभी तितली

तो कभी मोरपंखी 

और कभी कागज की 

छोटी-छोटी  मुड़ी हुई चिट 

मिलेंगी तुम्हें मेरी डायरी में

यही तो होंगी मेरी ऋचाएं 

सिर्फ तुम्हारे लिए l

 

सहज कर रख लेना

अक्सर याद आऊंगी 

भुला न पाओगे कभी !

 

होंगी डायरी के पन्नो में

कुछ कविताये

तुम्हारे दिए हुए नेह की 

भीनी ख़ुशबू में लिपटी

और तुम्हारे मनुहार में लिखी गयी

अनगिनत कविताएं भी 

सिर्फ तुम्हारे लिए  !

 

उसमें और भी अनेक

वेदना-संवेदना में डूबी

टूटी थकी कलम से 

कुछ प्रेम पातियाँ भी मिलेंगी

हो सकता है उनके कुछ शब्द 

आज भी भीगे हों

उनको भी पढ़ लेना

जो सिर्फ तुम्हारे लिए ....

 

पढ़ लेना मेरे जीवन के हर संवेग को

जो अनपढा अनगढा रह गया था

तुम्हारी अन्य व्यस्तताओं के कारण

 

और फिर तुम भी लिख देंना 

कोरे बचे पन्नों पर

अपने सोए हुए शब्दों की

 अनुभूति 

मेरी डायरी में

     

 वज़ूद

 

इस कायनात में 

अगर कुछ है

तो वो सिर्फ 

वज़ूद 

अगर वो है 

तो ..

ये सारी दुनियाँ 

तुम्हारे पक्ष में है ।  

इसलिए ,,,,

स्वयं को 

पढ़ो

लिखो

सँवारो,

अपने लिए भी,

कुछ वक़्त निकालो

खुद के, ख़ुद से

दफ़्न किये गए शौक़ को

जिंदा रखने के लिए..

गाओ

गुनगुनाओ,

थिरको

अपनी

मन की धुन पर ...!!!

देखो आईना

सज, सँवर कर,

मुग्ध हो अपने ही रूप पर,

अपनी ही देहयष्टि पर,

ये सुंदरता तुम्हारी है,

तुम्हारी अपनी है,,,,

करो,रसास्वादन

अपने, गुणों का

अपनी कलाओं का

अपनी खूबियों का

क्योकि....

इसी से तुम्हारा वज़ूद जिंदा है

तुम्हारी पहचान जिंदा है

तुम्हारा अस्तित्व  जिंदा है

अगर तुम्हारा वज़ूद

सबल है तो सबल भी 

तुम ही बनोगी... !!!

क्या जीना,,,

दूसरों की मुस्कुराहटों के लिए

अपने को रुला कर

अपना मन मार कर

दूसरों की ख्वाहिशें

पूरी करने के लिए

वो दूसरा है

दूसरा ही रहेगा

तुम्हारा नही होगा

अगर होता वो तुम्हारा

तो तुम्हें 

बिखरने न देता

स्वयं की खुशियों के ख़ातिर

तुम्हें मिटने न देता

तुम , तुम्हारा वज़ूद

ही तुम्हारा अपना है

और कोई

दूसरा नहीं 

सहेजो "स्व" को ...

 

 

 

 

|| संक्षिप्त परिचय ||

 

 सीमा पटेल

 -शिक्षा : स्नातकोत्तर  (हिंदी), बी.एड (कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी)          

 कत्थक नृत्य और तबला वादन में  प्रभाकर  ( प्रयाग संगीत समिति  इलाहाबाद )

व्यवसाय :  भूतपूर्व अध्यापिका  ( गुरुतेग बहादुर थर्ड सेनेटरी पब्लिक स्कूल, दिल्ली)

-रुचियां    :   पुराने नग़्मे  सुनना, चित्रकारिता ,हिंदी साहित्य में विशेष रुचि ।

-लेखन की प्रमुख विधा : 

कहानी, कविता , गीत, हायकू, क्षणिका।

राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में अनेकों कविता कहानियां प्रकाशित हो चुकी है। एक साझा उपन्यास में भी सहभागिता रही है ।

 

 

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