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साक्षी वर्मा की कविता

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                             सो जाऊं क्या ?  सो जाऊं क्या ?  लंबे सफर में एक लंबे अरसे से चलती रही हूं मैं बहुत दूर जाना है मुझे,इन रातों में जुगनुओं सी जलती रही हूं मैं नींद कहीं पीछे किसी कूंचे पर रख छोड़ आई हूं वापस ले आऊं क्या? थोड़ी देर सो जाऊं क्या? ये दर्द राहगीर बन साथ चले हैं मेरे, मानो इनकी हमसफ़र हुई हूं मैं तनहाई रातों में स्याही बन पीछे पड़ी है, टूटने पर और तोड़ी गई हूं मैं ये आंखें अब सूख चुकी है तुम पूछो हाल मेरा, मैं आंसू फिर से भर लाऊं क्या? इन गलियों से गुजरते अपनी ही दास्तां के ज़िंदा किरदार देखती आ रही हूं मैं, तुम इस फसाने से अंजान लगते हो कहो तुम्हे भी सुनाऊं क्या? क्या सुनाऊं तुम्हे भी मेरी ज़िन्दगी की चीखती खामोशी उस खामोशी से कुछ कहती मेरी तनहाई एक बेज़ुबां सी बोली सुनती मेरी परछाई मेरे ही साथ न जाने कितने रिश्ते लिए चलती मेरी परछाई कभी रोती तो कभी लडती,कभी गिरती और फिर खड़ी होती मेरी परछाई हर रोज़ एक जंग,हर रोज़ एक सी जंग लडत...

कविता कर्मकार की कवितायेँ

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  [ कविता कर्मकार मूलतः असमिया भाषा की युवा कवयित्री हैं  ...]            1 .  कैसे हैं हम                                                                                                कैसे हैं हम   कितने दिन अपनों से  बिना झूठ बोले, कह पायें   कि ठीक हैं हम  भला कैसे हो सकते थे हम  जो डूबे थे  एक उम्मीद में सरापा  अनबरसी बारिश की उस बूँद के लिए   जो बस... बरसने-बरसने को थी  उसी की प्रतीक्षा में तरसते हुए  पपीहे की तरह आस धरे  कैसे हो सकते थे हम...    वसंत की पुरवाई से सुगन्धित पलों में   या शरद की खुरदुरी साँसों  से भरे समय  की अनायास यादों में उलझे...

स्कन्दगुप्तः राष्ट्रीय चेतना का जीवन्त दस्तावेज

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                                                                  [ज्ञानेन्द्र स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं| इनके लेख समय-समय पर विविध पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं|]      ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह            साहित्य मानवीय सृष्टि है , अतः वह सोद्देश्य और मनुष्यता के प्रति उत्तरदायी होती है। जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उनकी अभिरूचि इतिहास के प्रति बहुत गहरी है। उनकी प्रायः सभी रचनाएँ या तो ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित हैं या पौराणिक आख्यानों पर अथवा ऐतिहासिक कल्पना पर। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि प्रसाद वर्तमान से पलायन या अतीत के प्रति रोमांस के कारण इतिहास को अपनाते हैं , बल्कि इतिहास को अपनाने के पीछे प्रसाद की रचनात्मकता की खास विशेषता है। वे इतिहास के माध्यम से तत्कालीन समस्याओं को समझने एवं उसे हल करने का प्रयास करते है...