सपना तंवर की चयनित कविताएँ
नवांकुर कवयित्री सपना तंवर की कविताएँ जीवन के गहरे बोध से जुड़ी हैं.इनका स्वर मोमबत्ती के मद्धिम प्रकाश की तरह है.समय के तनाव व समाज के बाइनरी के बीच सहज और शेड्स के रूप में देखती हैं.इनके यहाँ पुरुष सत्ता का नकार भी सकारात्मक है. उसे सहयोगी के रूप में देखती हैं.उसके टूटने पर उसे संभालने की कोशिश करती हैं.बिम्बों और प्रतीकों के अत्यधिक भार से बचती हैं.नये शिल्प को गढ़ने का प्रयास करती हैं. 1. सपना तंवर तुम्हे मैं नदी का वो छोर समझ बैठी थी , जहाँ से मेरा जीवन ठहरा सा दिखता था , तुमने बहाव ला कर , नदी में तूफान ला दिया , औऱ वो जो मेरा था , उसे बहा दिया , समझा दिया मुझे , अर्थ क्या ? ठहरा सा कुछ नही यहां , जो ठहर सका , वह "बदलाव" यहाँ। 2 .टूटा हुआ तुझे देख, तेरी आँखों मे, मुझे टूटा हुआ सूरज नज़र आता है, टूटा सूरज वो, जो तूने अपने सपनो से बुना, ढल गई रोशनी, बिखर गई रोशनी, तेरे सपनो के आँचल की, शाम हो आई तेरे जीवन मे, तुझे देख, जीवन की थकान का मंजर दिखता है ।। उठ, देख सूरज ढल गया, यह निशानी, ...