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कविता में गाँव की उपस्थिति

                                                   कुछ महत्वपूर्ण बातें चंद्रदेव यादव की कविताएँ इतनी अच्छी लगीं कि मैं निःसंकोच कह सकता हूँ यादव जी ने जो काम किया है वह अद्वितीय है l कम लोग हैं जो गाँव पर इतना सोच विचार कर लिखते हैं l उन्होंने अपनी भावनाओं और अपने समय और समाज से लोगों को जोड़ दिया है   - डॉ. पी. एन. सिंह ( मशहूर चिन्तक एवं आलोचक ) पिता का शोकगीत एवं गाँव नामा की कविताओं से मैं भलीभांति परिचित हूँ l पिता को लेकर जो लिखा गया है वह कविताओं में ही संभव है l कहानियों में वह शायद उतना भावप्रवण नहीं होता l इन कविताओं का आप चाहें जितनी बार पाठ करें, हर पाठ के बाद प्रश्न उठता है कि क्या हम सब कुछ समझ गये हैं कि कवि ने क्या कहना चाहा है ? शायद नहीं -       प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह (मशहूर साहित्यकार एवं चिन्तक चंद्रदेव यादव ने अपनी कविताओं में मौजूदा स्थितियों के प्रति असंतोष, आशंका, नफ़रत, क्षोभ, गु...

नींद गहरी है

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   कविताएँ      वंदना पराशर    रीढ़-विहीन लोग   उसकी रीढ़ की हड्डी    झुकती जा रही है वह हैरान नहीं है , थोड़ा परेशान है अपने बचपन की मासूमियत को खोकर आशंका है कि कल लोग रीढ़- विहीन हो जाएंगे उनके कान लम्बे किन्तु छिद्र प्राय: बंद होंगे सबके आंखों पर एक मोटी कांच की दीवार होगी जिसमें सबकुछ धुंधला दिखेगा स्वंय के बनाए हुए यंत्र ही   उसे ढाल देंगे एक यंत्र में जहां उसके सोचने- समझने की शक्ति संचालित होगी रोबोट की रिमोट से हाड़- मांस का बना यह शरीर एक यंत्र में बदल जाएगा खत्म हो जाएगी उसकी संवेदना उसकी हंसी , उसके आंसू सब नकली होंगे रीढ़- विहीन लोग   हताश होकर दौड़ रहें हैं चारों दिशाओं में कभी आकाश , कभी पाताल अंतरिक्ष के हरेक कोने में झांक रहे हैं और ढूंढ रहे हैं अपने लिए एक पहाड़- खुशियों का।                             एक गहरी चुप्पी   इतिहास में दर्ज हो जाएगी   कल की तरह ही आज की घटनाएं भी   वो तमाम बातें   वो तमाम किस्से   इतिहास ...