कविता में गाँव की उपस्थिति
कुछ महत्वपूर्ण बातें चंद्रदेव यादव की कविताएँ इतनी अच्छी लगीं कि मैं निःसंकोच कह सकता हूँ यादव जी ने जो काम किया है वह अद्वितीय है l कम लोग हैं जो गाँव पर इतना सोच विचार कर लिखते हैं l उन्होंने अपनी भावनाओं और अपने समय और समाज से लोगों को जोड़ दिया है - डॉ. पी. एन. सिंह ( मशहूर चिन्तक एवं आलोचक ) पिता का शोकगीत एवं गाँव नामा की कविताओं से मैं भलीभांति परिचित हूँ l पिता को लेकर जो लिखा गया है वह कविताओं में ही संभव है l कहानियों में वह शायद उतना भावप्रवण नहीं होता l इन कविताओं का आप चाहें जितनी बार पाठ करें, हर पाठ के बाद प्रश्न उठता है कि क्या हम सब कुछ समझ गये हैं कि कवि ने क्या कहना चाहा है ? शायद नहीं - प्रो. अब्दुल बिस्मिल्लाह (मशहूर साहित्यकार एवं चिन्तक चंद्रदेव यादव ने अपनी कविताओं में मौजूदा स्थितियों के प्रति असंतोष, आशंका, नफ़रत, क्षोभ, गु...