संदेश

अगस्त, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कविता कर्मकार की कवितायेँ

चित्र
  [ कविता कर्मकार मूलतः असमिया भाषा की युवा कवयित्री हैं  ...]            1 .  कैसे हैं हम                                                                                                कैसे हैं हम   कितने दिन अपनों से  बिना झूठ बोले, कह पायें   कि ठीक हैं हम  भला कैसे हो सकते थे हम  जो डूबे थे  एक उम्मीद में सरापा  अनबरसी बारिश की उस बूँद के लिए   जो बस... बरसने-बरसने को थी  उसी की प्रतीक्षा में तरसते हुए  पपीहे की तरह आस धरे  कैसे हो सकते थे हम...    वसंत की पुरवाई से सुगन्धित पलों में   या शरद की खुरदुरी साँसों  से भरे समय  की अनायास यादों में उलझे...

स्कन्दगुप्तः राष्ट्रीय चेतना का जीवन्त दस्तावेज

चित्र
                                                                  [ज्ञानेन्द्र स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं| इनके लेख समय-समय पर विविध पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं|]      ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह            साहित्य मानवीय सृष्टि है , अतः वह सोद्देश्य और मनुष्यता के प्रति उत्तरदायी होती है। जयशंकर प्रसाद की रचनाओं का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उनकी अभिरूचि इतिहास के प्रति बहुत गहरी है। उनकी प्रायः सभी रचनाएँ या तो ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित हैं या पौराणिक आख्यानों पर अथवा ऐतिहासिक कल्पना पर। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि प्रसाद वर्तमान से पलायन या अतीत के प्रति रोमांस के कारण इतिहास को अपनाते हैं , बल्कि इतिहास को अपनाने के पीछे प्रसाद की रचनात्मकता की खास विशेषता है। वे इतिहास के माध्यम से तत्कालीन समस्याओं को समझने एवं उसे हल करने का प्रयास करते है...

कोमल भारती गुप्ता की पाँच कविताएँ

चित्र
[कोमल भारती  गुप्ता]   [ कोमल की कविताएँ सृजन के तलाश की कविताएँ हैं l वे प्रति क्षण सृजन की आग्रही हैं l उनके यहाँ सृजन के साथ कस्मसाहट जिस आवेग  के साथ आता है ,वह अधिक देर तक नहीं रह पाता l  अकेलापन, निराशा ,जीवन की तीक्ष्ण छटपटाहट और बाज़ार उन पर हावी नहीं होता l बल्कि अपनी कविताओं से उसका क्रिटीक रचती हैं और सघन जीवन के अनुभवों को नए सन्दर्भ में खोलने का प्रयास करती हैं l  वे समानता की पक्षधर हैं l लैंगिकभेद की पूर्वाग्रही नहीं...]         1. तुम चले तो गए पर ये होंठों पर तुम्हारी गरमाहट का एहसास रह गया ये मेरी बाहों में बैठा तुम्हारा सुकून रह गया ये मेरी गोद में तुम्हारे रखे सर का हल्कापन रह गया ये मेरी जुल्फों का बिखरने पर तुम्हारे समेटने का निशान रह गया, ये मेरी उंगलियों में तुम्हारी उंगलियों का स्पर्श रह गया ये हथेलियों में हमारे साथ का भविष्य रह गया ये मेरे पैरों में चुभ आया कंकड़, तुम्हारे हाथों से निकालना रह गया ये तुम्हारे पास चल के आने का एहसास रह गया तुमसे मिलने की कसक रह गई ये चादर पर हमार...