कविता कर्मकार की कवितायेँ
[ कविता कर्मकार मूलतः असमिया भाषा की युवा कवयित्री हैं ...] 1 . कैसे हैं हम कैसे हैं हम कितने दिन अपनों से बिना झूठ बोले, कह पायें कि ठीक हैं हम भला कैसे हो सकते थे हम जो डूबे थे एक उम्मीद में सरापा अनबरसी बारिश की उस बूँद के लिए जो बस... बरसने-बरसने को थी उसी की प्रतीक्षा में तरसते हुए पपीहे की तरह आस धरे कैसे हो सकते थे हम... वसंत की पुरवाई से सुगन्धित पलों में या शरद की खुरदुरी साँसों से भरे समय की अनायास यादों में उलझे...