गाँवनामा : धरणी के रंगरेज किसान
आलेख सुशील द्विवेदी क ल्पना कीजिये आपके हाथ में एक कूची, कई प्रकार के रंग और एक कैनवास है | आपको एक चित्र बनाना है, आप सबसे पहले किसका चित्र बनायेंगे? आप सोच रहे होंगे कि मैं नदी, पर्वत, झरना, सागर, स्त्री जैसे अनेकानेक विषयों में से कोई एक विषय के बारे में कह रहा हूँ, ऐसा बिल्कुल नहीं है | आप अपनी चित्तवृत्ति के अनुसार ही चित्र बनायेंगे | मेरा मानना है कि मानव सभ्यता के आरम्भ में सबसे पहले यदि किसी ने रेखांकन किया होगा तो वे इस धरती के किसान थे | किसान माने सभ्यता और संस्कृति के जनक | उनके रेखांकन में कल्पना, हर्ष, संघर्ष और संताप की लकीरें अवश्य होंगी | पाषाणयुगीन शैलचित्रों, भित्तचित्रों या मृद्भांडों में उत्कीर्ण कलाकृतियां किसान चेतना की गवाक्ष हैं | इन गवाक्षों से साहित्य के प्रथमांकन, उनके जीवनयापन या उनके चितेरामन की झलक मिलती है | गाँवों के निर्माण, वास, अधिग्रहण, प्रव्रजन की घटनाएँ सिन्धु सभ्यता से बहुत पहले शुरू हो गयी थीं | सिन्धु या वैदिक सभ्यता में जिन किसानों या गाँवों का विवरण मिलता है, वह उस कालखंड के गाँवों के सम्पूर्ण क्रियाकलापों, उनक...