मैं तुम्हारा चातक कृषक

              

 मीता दास की कुछ कविताएँ

 

               

 

           

मीता दास
{ 1 } उदास है आकाश  
    
आज उदास है आकाश
हवाओं का भी मन उदास हैं 
काले - कपसीले बादलों का कारवाँ 
रह - रह गुजर रहा है 
चहुँ ओर उकेर रहे मन लुभाते चित्र 
बादल और आसमान   
पर आज मन उदास है,
हवायें भी हैं बोझिल सी 
मन रोता है 
तुझे ढूंढता है
इस करवट और उस करवट 
जो टकरा रहे हैं आसमान पर 
झिर - झिर की झड़ी भी है लापता
और ठग रहे हैं ठगुआ बादल और बारिश  
सुन रही हो गर्जन - तर्जन !
पर चुप क्यों हो ?
क्या तुम जाग रही हो प्रकृति !     
फोटोग्राफी : कांतिभाई सोलंकी


               
 
{ 2 }   आषाढ़ की शाम  
                                 
  स्तब्ध है आज की शाम
हवाओं के पंख भी शांत 
कदम के पेड़ पर खिला फूल शांत हैं
कल सारी रात झूम के बरसा था मेघ , अब है क्लांत 
ढूंढता फिर रहा था कल एक रात जागा पाखी निज नीड़ 
अपने साथी से बिछड़ने और नीड़ के खो जाने का 
उसका अंतर्नाद सुना क्या तुमने
कितना निर्दयी है तू आषाढ़ , और तेरी झमाझम बारिश !
 
आज सुबह मुझे नजर आया था 
उस पाखी का बिखरा भीगा नीड़ 
मुझे भीतर तक भेद गया , स्तब्ध हूँ 
कल का अंतर्नाद और साथी हारा का रुदन 
 
आषाढ़ कैसा है तू ! 
किसी को देता सुख 
और किसी को मृत्यु  
या कर देता गृह हीन
|| 
           
 
{ 3 }   मैं तुम्हारा चातक  कृषक 
                                         
  नीला आसमान ऊंघ रहा है 
इक्का - दुक्का विलासी बादल टकरा रहे हैं 
क्षणिक विद्युत की चमक लिए 
लगता है गले ल रहे हैं वे 
आपसी प्रेम बढ़ा रहे हैं  l 
 
इंसान क्यों नहीं बढ़ा रहा प्रेम ! 
 
बड़े जलाशय सूख रहे हैं 
उसके केंकड़े खेतों में घूम रहे हैं पानी तलाशते 
क्षणिक विद्युत् की चमक से भ्रमित हो 
वापस दौड़ते जलाशय की ओर 
और रौंदे जाते गाड़ी या पकड़े जाते इंसानी हाथों में 
 
ओ मेघ 
मैं तुम्हारा चातक  कृषक 
ढूंढता फिरता हूँ, घास - तृण
लता और कभी - कभी धूल कणों में  
जहां थोड़ी देर पहले मेघों के टकराने से 
विद्युत् चमका था, मेघ गले लग रहे थे और 
तुम्हारी ऑंखें छलक आईं थीं एक बरस बाद जो मिले थे 
छलके हुए आंख का पानी और उसके छींटे बिखर गए थे 
मुझ गरीब के खेत में 
उसकी सौंधी गंध से बेसुध हो मैं ढूंढ रहा हूँ तुम्हे 
तृण , लता और धूल कणों में  l
 
बारिश 
तुम आना मेरे खेतों में और भरपूर बरस जाना 
मेरी बुधिया सावन में भुट्टे भून कर देती है बच्चों को 
और मेरे बच्चे ख़ुशी से झूम उठते हैं और गाते हैं
 l  
 
"हरी थी मन भरी थी , लाख मोती जड़ी थी,
राजा जी के बाग़ में , दुशाला ओढ़े खड़ी थी |" 
 
                   
 

 

 
[ 4 ]      पीढ़ियां    
 
भयावह रुदनों से अंटी 
जीर्ण धूसर पुराने जालों और धुएं से 
कलियाई दीवारों पर 
एक भी मकड़ी जीवित नहीं दिखती
 
पर धुएं की कालिख से 
दीवारों पर बीते दिनों का 
इतिहास 
​स्पष्ट​
 बिम्बित हैं 
 याद में , इंतजार में 
ठक - ठक कर बजता 
सूखे मौसमों के बयार में 
सदर दरवाजे का कुंडा 
रुक - रुक कर तेज आती हवाओं के संग नाचती 
पुरखों की अस्थियां 
जो विसर्जित होने से बची रही 
 
नई पीढ़ी साहेबी परिधानों में 
छुरी - काँटों से चींथते हर तरह , हर मौसम के व्यंजन 
पर भूखी आत्मायें 
इंतजार में उत्सव मानतीं 
उन्ही खँडहर होते प्रासादों में 
जिसमे उनके पुरखे , उनके भी पुरखे और उन पुरखों के भी पुरखों की
 
यादें थीं , पीढ़ी दर पीढ़ी संग रहते चुपचाप 
बगैर शोर - शराबे के तकते फलते - फूलते प्रजन्म को 
वे कोई उत्सव नहीं करते 
​,​
ये हैं कुछ नए उत्पाती तत्व 
जिन्होंने मकड़ियों का भी रक्त चट कर डाला 
त्रस्त होकर l
​  
क्या देखते हो ?
बिला जाओ तुम 
धूप - हवा , पानी और मिटटी में 
बह जाओ बाढ़ में , उड़ जाओ तेज आँधियों में 
धंस जाओ भूकंप में 
वे समझ ही नहीं पाते उनके होने और न होने का अर्थ 
भूतों संग नाचती अस्थियां को
 
भूखी आत्माएं देख रहे हो तुम ​
 नई पीढ़ी रम और व्हिस्की में डूबी हुई है और 
तुम खामख्वाह गंगाजली की जिद पर अड़े हो !
 
 
                          ०००००० 
फोटोग्राफी - कांतिभाई सोलंकी 

 




परिचय पत्र :-
 
मीता दास, 12 जुलाई सन 1961, जबलपुर { म. प्र.), बी. एस. सी. ।
हिंदी भाषा & बांग्ला  भाषा में कविता, कहानी, लेख, अनुवाद और संपादन
प्रकाशित ग्रन्थ --" अंतर मम" काव्य ग्रन्थ, बांग्ला भाषा ।
नवारुण भट्टाचार्य की कविताओं के अनुवाद," भारतीय भाषार ओंगोने "( अनुवाद हिंदी कवियों का बांग्ला भाषा मे अनुवाद  ) " संग्रहालोये काटा पा " { अग्निशिखर की अनुदित कवितायें } , '' पाथुरे मेये '' {बांग्ला काव्य संकलन } , " काठेर स्वप्न " हिंदी की प्रतिनिधि कहानियों का बांग्ला अनुवाद , जोगेन चौधुरी की दो संस्मरण पुस्तिकाओं का  हिंदी अनुवाद , नवारुण भट्टाचार्य , सुकान्त भट्टाचार्य की कविताओं के अनुवाद प्रकाशन की ओर । जोगेन चौधुरी की कविताओं का हिंदी अनुवाद 
 
 दूरदर्शन और आकाशवाणी रायपुर से प्रसारण ।
हिंदी एवं बांग्ला कहानी एवं कविताओं का लगातार लेखन एवं रेखांकन का प्रकाशन और संपादन । 
 
कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र - पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में लेखन ।
 
सम्मान - खूबचंद बघेल सम्मान , राष्ट्रभाषा प्रचार प्रसार समिति से महात्मा गांधी सम्मान , बांग्ला में - कवि रवींद्र सूर सम्मान । प्रेमचंद अगासदिया सम्मान ।
संप्रति ----
1 छत्तीसगढ़ जन संस्कृति मंच ( अध्यक्ष )                    
2 बंगीय साहित्य संस्था भिलाई शाखा ( कोषाध्यक्ष  )                            
संपर्क --- 63/4 नेहरू नगर पश्चिम , भिलाई , छत्तीसगढ़ , 490020
चलभाष - 9329509050
ईमेल - mita.dasroy@gmail.com
 

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