शेष रह जाती हैं स्त्रियाँ
हर रोज सुबह
बसुली,कुदाल,फावडा़...
लिए हुए मजदूरों का झुंड
शहर की ओर भागता है।
हर रोज सुबह ही
भागते हैं चील,कौवे और गिद्ध.
हर रोज सुबह ही भागते हैं
पंडित, मौलवी और पादरी...
बस...
शेष रह जाती हैं स्त्रियाँ
और उनको निगलता हुआ अंधेरा...
बसुली,कुदाल,फावडा़...
लिए हुए मजदूरों का झुंड
शहर की ओर भागता है।
हर रोज सुबह ही
भागते हैं चील,कौवे और गिद्ध.
हर रोज सुबह ही भागते हैं
पंडित, मौलवी और पादरी...
बस...
शेष रह जाती हैं स्त्रियाँ
और उनको निगलता हुआ अंधेरा...
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