''सर्वेक्षणी ''
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी
रक्षा देश, रक्षणी।
युवा धरा पुकारती,
सकामवस निहारती,
बिखेरती,सवांरती
ये दिव्य रत्न भारती।।
सकाम, मोह भक्षिणी,
सर्वेक्षणी ,सर्वेक्षणी ।
अनन्त रूप धारिणी ,
अनन्त कष्ट निवारिणी,
सुहावनी,विदारणी,
अनन्त रस भारिणी।।
रक्षा वीर्य, रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ।।
कुरान, वेद, संहिता,
अनन्त रत्न धर्मिता,
प्रकाश पुञ्ज सेविता,
प्रखर ज्योति दिव्यता ।।
अनन्त हो,अनन्त तुम
अनन्त दिव्य रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ॥
पुष्प, रन्ध्र, पल्लवम्,
वनादि ,रज सुवासितम्
माम् भारती प्रियम् ,
नमामि त्वम् दिव्यतम् ॥
दायुतम् वर रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ।।
रक्षा देश, रक्षणी।
युवा धरा पुकारती,
सकामवस निहारती,
बिखेरती,सवांरती
ये दिव्य रत्न भारती।।
सकाम, मोह भक्षिणी,
सर्वेक्षणी ,सर्वेक्षणी ।
अनन्त रूप धारिणी ,
अनन्त कष्ट निवारिणी,
सुहावनी,विदारणी,
अनन्त रस भारिणी।।
रक्षा वीर्य, रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ।।
कुरान, वेद, संहिता,
अनन्त रत्न धर्मिता,
प्रकाश पुञ्ज सेविता,
प्रखर ज्योति दिव्यता ।।
अनन्त हो,अनन्त तुम
अनन्त दिव्य रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ॥
पुष्प, रन्ध्र, पल्लवम्,
वनादि ,रज सुवासितम्
माम् भारती प्रियम् ,
नमामि त्वम् दिव्यतम् ॥
दायुतम् वर रक्षणी,
सर्वेक्षणी, सर्वेक्षणी ।।
(वर्ष 2012 में हिन्दी साहित्य अकादमी, प्रयाग में पढ़ी गयी कविता ।)
सुशील द्विवेदी
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