"जिन्दगी एक स्याह है"
मैंने जिन्दगी को
उस दिन बड़ी नजदीक से जाना
जब खुलेआम सड़क के किनारे
पडी लाश का खून स्याह पड गया था।
तब मैंने समझा कि
जिन्दगी एक स्याह है।
लाश के सामने खड़ी भीड़
फुसफुसा रही थी कि
"शराबी था,रोज मारता था इसे..
यह दुश्शील थी....
अगैरा वगैरा...."
मीडिया,पुलिस, नेता,
सब आ गये थे
लेकिन उसे किसी ने हटाया नहीं।
मैंने किसी बड़े बुजुर्ग से पूछा,
"यह कौन थी,क्यों इसे मारा गया"
कुछ बताने से पहले वह रोने लगा,
मैंने समझा उस दिन
बुजुर्ग के जीवन में पड़ी स्याह को।
घर में काम करने वाली बाई ने भी
जिक्र किया था माँ से,
माँ भी उस दिन रोने लगी थी,
तब मैंने नहीं समझा था
कि माँ के जीवन में भी स्याह है।
हाँ इतना याद है मुझेमाँ सीसे के सामने खड़ी होकर ,
कुछ देख रही थी,उस दिन बड़ी नजदीक से जाना
जब खुलेआम सड़क के किनारे
पडी लाश का खून स्याह पड गया था।
तब मैंने समझा कि
जिन्दगी एक स्याह है।
लाश के सामने खड़ी भीड़
फुसफुसा रही थी कि
"शराबी था,रोज मारता था इसे..
यह दुश्शील थी....
अगैरा वगैरा...."
मीडिया,पुलिस, नेता,
सब आ गये थे
लेकिन उसे किसी ने हटाया नहीं।
मैंने किसी बड़े बुजुर्ग से पूछा,
"यह कौन थी,क्यों इसे मारा गया"
कुछ बताने से पहले वह रोने लगा,
मैंने समझा उस दिन
बुजुर्ग के जीवन में पड़ी स्याह को।
घर में काम करने वाली बाई ने भी
जिक्र किया था माँ से,
माँ भी उस दिन रोने लगी थी,
तब मैंने नहीं समझा था
कि माँ के जीवन में भी स्याह है।
हाँ इतना याद है मुझेमाँ सीसे के सामने खड़ी होकर ,
बस उनकी हिचकियां मुझे सुनाई दी थी,
आज मैंने समझा,
जिन्दगी एक स्याह है।
कुछ दिन पहले
अस्पताल के कैजुअलटी में
मैंने देखा कि
कोई बीस बरस की लड़की
जोे बाप से पीटी गयी थी,
औंधी पड़ी है।
कुछ दिन पहले
मैंने देखा
कि चार बरस की लड़की का गाल
स्याह हो गया था।
उस दिन मैंने जाना
जिन्दगी एक स्याह है
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