मृत लोगों से बचने का जतन

मृत लोगों से बचने का जतन
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घंट बांधे जा रहे हैं
गाँव के एक पुराने पीपल पर
किसी एक के नाम पर नहीं
परिवार के पूरे दस सदस्यों के नाम
जिन्हें कल रात गोली मार दी गयी थी
मारने वाले कोई और नहीं थे
इसी गाँव के मुखिया थे और उनके चचेरे भाई
मुखिया ने इससे पहले भी कई बार कोशिश की थी उन्हें मारने की
यह बात गाँव का हर व्यक्ति जानता था और पुलिस भी
फिर भी उन्हें मार दिया गया
सुबह से उनके कुछ रिश्तेदार जोर जोर से बिलख रहे थे
कुछ टिपटी की तैयारी में जुटे थे
कुछ बात कर रहे थे पांचक की
- 'पांचक में मरना सबसे खतरनाक होता है'
यह बात गाँव में आग की तरह फैली
पहले एक चिड़िया टप्प से गिरी
फिर दूसरी,तीसरी फिर न जाने कितनी चिड़िया उस रोज गिरी
फिर कुछ कुत्ते एक साथ रोने लगे
बिल्लियां तेजी से इधर उधर आने जाने लगीं
और तेज तेज बोलने लगीं।
धीरे धीरे और बाद में बड़े जोर से
गाँव में कोहराम मच गया
कुछ लोगों ने अपनी सबसे पुरानी दोहनी में
कंडे की आग जला दी,उसमें लोहबान डाल दिया
फिर उसे घर से बाहर किसी सुनसान जगह में रख आये
कुछ ने अपने बचाव में
ओझाई बैठाया
कुछ जोर जोर से चीख रहे थे
कि मैं फलां हूं,मैं फलां हूं
कुछ ताबीज बनवा लाये
और खुद, बच्चों को, पत्नी को बाँध दिए
कुछ लोगों ने लौंग में मंत्र फूंकवा लिया है
और कुछ ने बिरंजी में ।
कुछ ने चारपाई के पेरुआ में बिरंजी गाड़ दिया
और घर के सब लोगों को लौंग खिला दिया
उनके कत्ल के बाद सबने अपने बचने की तैयारी की

©सुशील द्विवेदी

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