बारिश का इंतजार
बारिश का इंतजार
••••••••••••••••••••
मौसम वैज्ञानिकों ने सूचना दी है-
'इस साल मानसून देर से आयेंगे'
फिर भी किसानों ने 'बिहाड़' कर दिया है
बाद में वे 'लईना' लगवायेंगे
वे एक बांह खेतों को जोत चुके हैं
अब उससे घास-फूस और मोटी जड़े बाहर कर रहे हैं
कुछ स्त्रियों ने महुए और दाल पहले से तैयार कर लिया है
वे इस चौमासे में 'मऊखरी' बनायेंगी
कुछ ने 'लईना' लगाने के लिए अपनी टोली बना ली है
और वे बाद में 'लईना' लगायेंगी
और अपने बेसुरे आवाज में 'कजरी' गायेंगी
कुछ स्त्रियाँ चौखट में, 'भुसौले' में
अपने कमाऊ परदेसी- पति को याद करेंगी
वे कभी उदास होंगी, कभी रो देंगी...
कुछ घरों में बच्चियों ने मेंहदी खरीद लिया है
कुछ ने गुड़ और चाय की मेंहदी बनाने की ठान ली है
वे बात कर रही हैं-
'गुड़ की मेंहदी अधिक रचती है'
कई बच्चों ने अपने दादा के नये 'स्वदेशी' चप्पल काट डाले हैं
वे उससे दो पहिया,चार पहिया गाड़ी बनायेंगे
और बारिश में दूर तक भागेंगे
कुछ ने अपनी 'बालपोथी' फाड़कर नाव बना दी है
मछुआरों ने 'तांत' और 'कटिया' खरीद लिया है
बाद में वे तालाब और नहर में जायेंगे
और वहाँ से मछलियाँ पकड़ेंगे
कुछ चरवाहों ने अपना 'नारा' तैयार कर लिया है
कुछ उसमें शामिल हो रहे हैं
वे अपने मवेशियों को खेतों में खुला छोड़ देंगे
दोपहर में वे 'सुर्रा' खेलेंगे और वे जामुन तोड़ेंगे, और आम भी
वे 'लसोहरा' के ऊपर चढ़ जायेंगे
और जोर जोर से कूदेंगे
इस बारिश में सबने अपने उत्सव की तैयारी कर ली है
किन्तु हाय!
मानसून देर से नहीं, बहुत देर से आये
और 'परी भर' बरस कर चले गये ...
©सुशील द्विवेदी
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मौसम वैज्ञानिकों ने सूचना दी है-
'इस साल मानसून देर से आयेंगे'
फिर भी किसानों ने 'बिहाड़' कर दिया है
बाद में वे 'लईना' लगवायेंगे
वे एक बांह खेतों को जोत चुके हैं
अब उससे घास-फूस और मोटी जड़े बाहर कर रहे हैं
कुछ स्त्रियों ने महुए और दाल पहले से तैयार कर लिया है
वे इस चौमासे में 'मऊखरी' बनायेंगी
कुछ ने 'लईना' लगाने के लिए अपनी टोली बना ली है
और वे बाद में 'लईना' लगायेंगी
और अपने बेसुरे आवाज में 'कजरी' गायेंगी
कुछ स्त्रियाँ चौखट में, 'भुसौले' में
अपने कमाऊ परदेसी- पति को याद करेंगी
वे कभी उदास होंगी, कभी रो देंगी...
कुछ घरों में बच्चियों ने मेंहदी खरीद लिया है
कुछ ने गुड़ और चाय की मेंहदी बनाने की ठान ली है
वे बात कर रही हैं-
'गुड़ की मेंहदी अधिक रचती है'
कई बच्चों ने अपने दादा के नये 'स्वदेशी' चप्पल काट डाले हैं
वे उससे दो पहिया,चार पहिया गाड़ी बनायेंगे
और बारिश में दूर तक भागेंगे
कुछ ने अपनी 'बालपोथी' फाड़कर नाव बना दी है
मछुआरों ने 'तांत' और 'कटिया' खरीद लिया है
बाद में वे तालाब और नहर में जायेंगे
और वहाँ से मछलियाँ पकड़ेंगे
कुछ चरवाहों ने अपना 'नारा' तैयार कर लिया है
कुछ उसमें शामिल हो रहे हैं
वे अपने मवेशियों को खेतों में खुला छोड़ देंगे
दोपहर में वे 'सुर्रा' खेलेंगे और वे जामुन तोड़ेंगे, और आम भी
वे 'लसोहरा' के ऊपर चढ़ जायेंगे
और जोर जोर से कूदेंगे
इस बारिश में सबने अपने उत्सव की तैयारी कर ली है
किन्तु हाय!
मानसून देर से नहीं, बहुत देर से आये
और 'परी भर' बरस कर चले गये ...
©सुशील द्विवेदी
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